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Sunday, 23 February 2014

रत्नों के गुण (Qualities of the Gemstones


किसी भी वस्तु या पदार्थ को पहचानना हों तो उसके लिये सबसे पहले पदार्थ या वस्तु के गुणों की जानकारी होनी चाहिए. गुणों को समझे बिना किसी रत्न के विषय में कुछ भी कहना कठिन होता है. विज्ञान के क्षेत्र में भी किसी भी पदार्थ को उसके गुणों से ही समझना चाहिए. आईये देखे की रत्नों को गुणों के आधार पर किस प्रकार पहचाना जा सकता है. 

रत्नों से एक से अधिक रंगो की किरणें (Gemstones of more than One Color Auras) 
रत्नों का एक महत्वपूर्ण गुण है की कुछ रत्नों में एक से अधिक / कम रंग की किरणें दिखाई देती है. रत्न को एक ओर से देखने पर एक रंग तथा दुसरी ओर से देखने पर दूसरा रंग दिखाई देता है. इस प्रकार के गुण नील, माणिक्य, पन्ना, पुखरा, एमेथिस्ट, टोपाज, मूनस्टोन आदि रत्नों में यह गुण पाया जाता है. इन में से किसी भी रत्न को पहचानने के लिये इस गुण की जांच की जा सकती है (consider this quality to find difference between the fake stone and real stone). 

एक ही प्रकार की किरणें (Auras of the Same Color) 
जिन रत्नों का रंग चारों ओर से एक जैसा दिखता है (one color from all the directions). उन रत्नों को इस श्रेणी के रत्नों में रखा जाता है. इस श्रेणी के रत्नों में हीरा, माणिक्य, झिरकाँन, ओपल आदि रत्न आते है. माणिक्य रत्न एक से अधिक रंगों की किरणों की श्रेणी में भी पाया जाता है. तथा इस प्रकार के श्रेणी में यह पाया जाता है. 

बिल्ली की आंखो के रंग के रत्न (Gemstone of the Cat's Eye Color) 
अनेक रत्न बिल्ली की आंखों मे रंगों में पाये जाते है (gemstones similar to the color of Cat's eye ). बिल्ली की आंखों को ध्यान से देखने पर उनमें रेखायें दिखाई देती है. इसी प्रकार की रेखायें तराशने से पूर्व के रत्नों में भी पाई जाती है. किसी रत्न में यह एक रेखा, किसी में चार, किसी में छ: रेखायें होती है (different number of lines in the gemstones). इस प्रकार के सभी रत्नों को बिल्ली की आंखों के रत्न कहा जाता है. इन रत्नों में मूनस्टोन, लोहित पाषाण, टायगर आदि रत्नों में यह विशेष गुण पाया जाता है. 

रत्नों के रंग (Colors of the Gemstones) 
रत्नों के रंग व आकर्षण के अनुरुप ही उनके रंग होते है. अलग- अलग रत्नों के रंग अलग- अलग होते है. रत्नों में भिन्नता "मेटालिक आँक्साईड" के कारण आती है (Difference occurs because of Metallic Oxide). इसके कारण ही फिरोजा, मूंगा, ओपल, तुरमलिन, अलेक्झान्ड्रा जैसे रत्न केवल अपने सुन्दर , मनोहारी छटा के कारण अन्य रत्नों में अपना स्थान बना पाते है. तुरमलिन रत्न में अनेक रंग दिखाई देते है. 

तुरमलिन श्रेणी के किसी रत्न में ऊपरी हिस्सा सफेद तो निचला हिस्सा हरा, मध्य हिस्सा लाल व बाहरी हिस्से में नीला रंग स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है. इसी प्रकार अलेक्झान्ड्रा रत्न में तीन रंग की किरणें सूर्य के प्रकाश में अलग रंग की अथा छाया में अलग रंग के दिखाई देते है. परन्तु इन रत्नों के सभी रंग स्थायी नहीं होते है. 

रत्नों के रंगों में बदलाव (Changeability in the Colors of Gemstones) 
समय के अनुसार इन रत्नों का रंग बदलता रहता है. फिरोजा रत्न प्राप्ति के समय बेह्द खूबसूरत होता है. परन्तु प्रकाश के प्रभाव में आने पर इनका रंग बदल जाता है. रत्नों को जब प्रयोग में नहीं लाया जाता है. उस स्थिति में भी कई बार रत्नों का रंग फिका हो जाता है. तापमान बढने पर भी रत्न अपना रंग परिवर्तित करते है. परन्तु पन्ना रत्न लम्बे समय तक धारण करने पर भी अपने रंग को स्थायी बनाये रखता है (Emerald's color can stable for the long time). 

रत्नों को तपाने ( अत्यधिक तापमान) से बचना चाहिए. अन्यथा उनका रंग उडने की संभावनाएं बनती है. मोती जैसे रत्न तो पसीने के प्रभाव में आने पर भी अपना रंग बदल लेते है. 

रत्नों में रंगों के धब्बे होते है (Color Spots in the Gemstones) 
कुछ रत्नों में रंग सारे रत्न में फैला हुआ न होकर उसके मात्र कुछ धब्बे ही दिखाई देते है. धब्बों की श्रेणी में पाये जाने वाले रत्नों में नीलम, एमेथिस्ट, टोपाज व पुखराज मुख्य रुप से पाये जाते है. 

रत्नों पर ताप का प्रभाव (Impact of Temperature on the Gemstones) 
हर रत्न पर ताप ( टेम्परेचर ) का अलग प्रभाव होता है. ओपल रत्न को ताप के संपर्क में लाने पर वह बीच से फूट जाता है. फिरोजा तापमान के संपर्क में आने पर रंगहीन हो जाता है ( If Amethyst comes in the contact of temperature then it will become colorless). एमेथिस्ट रत्न को जब गर्म किया जाता है. तो वह पीला हो जाता है. पीला पुखराज अत्यधिक तापमान के सीमा क्षेत्र में आने पर सफेद हो जाता है. मोती में दरारें पड जाती है. 

तुरमलिन रत्न तापमान के प्रभाव में आता है तो उस रत्न से बिजली उत्पन्न होती है. जिस रत्न में रसायनिक पदार्थ अधिक होते है वह रत्न तापमान के सम्पर्क में शीघ्र अपना रंग बदलता है. इसलिये जहां तक हो सके, रत्नों को ताप से दूर रखने का प्रयास करना चाहिए. 

विधुत शक्ति (Lightening Power) 
कुछ रत्नों में यह गुण पाया जाता है. कि जब वे गर्मी के संम्पर्क में आते है. तो उनमें विधुत शक्ति उत्पन्न होने की संभावना रहती है. कुछ रत्न ताप के सुचालक होते है. ताप संम्पर्क में आने पर भी वे ठण्डे रहते है ( they become conductive due to influenced by temperature). जो रत्न कुचालक होते है. वे ताप प्रभाव से गर्म हो जाते है. हीरा ताप सुचालक है. 

पुखराज, मूंगा जैसे रत्न ताप के कुचालक है. स्फटिक, तुरमलिन, नीलम के रत्न विधुतमय होते है. कुछ रत्नों में घर्षण होने पर उनमें विधुत उत्पन होती है. अंबर, हीरा, तुरमलिन ये रत्न विधुत उत्पन करते है. 

नकली रत्न (Fake Gemstones) 
रत्न बहूमूल्य या कम मूल्य का हो सकता है (Gemstones can be expensive or cheap in rates). परन्तु आज बडे प्रमाण में बनावटी या नकली रत्न बाजार में पाये जाते है. बनावटी रत्नों को असली रत्नों में पहचानना मुशिकल काम है . फिर भी उपरोक्त गुणों को ध्यान में रखते हुए इन्हें पहचानने का प्रयास किया जा सकता है.

रत्नों का परिक्षण Analysis of Gemstones

सामान्यत: रत्नों की सही परख करना आम व्यक्ति के लिये बेहद कठिन कार्य है. रत्नों की परख करने के लिये सामान्य दिशा निर्देशों का पालन करने पर इस मुश्किल कार्य को सरल बनाया जा सकता है. फिर भी रत्नों पर कुछ प्रयोग करके हम असली व नकली में अन्तर कर सकते है (Differentiation between real and fake Gemstone). 

कुछ रत्न बिजली के प्रकाश में पहचाने जाते है. तो कुछ को कृ्त्रिम प्रकाश में नहीं पहचाना जा सकता है. असली - नकली में भेद करने के लिये सामान्य प्रयोगों के साथ-साथ रसायन शाला (analysis of real and fake gemstones through chemistry lab) की सहायता भी ली जा सकती है. सामान्य रुप से रत्नों के असली या नकली में अन्तर करने के निम्न तरीके है 

रत्नों में हवा के बुलबुले (Air Bubbles in the Fake Gemstones) 

नकली रत्नो में हवा के बहुत छोटे बुलबुले होते है. (real gemstones does not contain air bubbles) ये बुलबुले सामान्य रुप से असली रत्नों में नहीं पाये जाते है. ये बुलबुले गोल व टेढे-मेढे आकार के हो सकते है. रत्नों को जब प्रकाश में देखा जाता है. तो उनके अन्दर के ये बुलबुले सामान्य रुप से नजर आ जाते है. इस गुण के आधार पर दोनों में भिन्नता की जा सकती है. 

  • माणिक्य, नीलम, पुखराज ये रत्न नकळी होने पर असली रत्न से वजन में हल्के होते है (fake Ruby, Blue Sapphire and Yellow Sapphire are low in weight than real gemstones). रसायन शाला में इनका परिक्षण करने पर नकली रत्न "ब्रामोफार्म" द्रव्य में तैरते रहते है(fake gemstone floats in the Bramoforma and real place on the bottom). तथा असली रत्न तलह्टी मे बैठ जाते है.

  • असली माणिक्य या नीलम रत्नों में रेशम जैसा मुलायम प्रभाव रहता है. नकली में यह प्रभाव नहीं पाया जाता है.

  • असली रत्न में लाईन आने पर वह चमकदार नहीं होती व टेढी-मेढी भी नहीं होती है (brightness in the real and fake gemstones). इसके विपरीत वह सदैव रहती है. जबकि नकली रत्नों में चमकदार, टेढी-मेढी हो सकती है.

  • असली माणिक्य को देखने पर आंखों को ठंडक देता है. जबकि नकली माणिक्य को देखने पर आंखों को गर्मी का अहसास होता है.

  • (Examine real and fake Coral) असली मूंगे पर हायड्रेक्लोरिक एसेड डालने पर उस पर झाग नजर आता है. पर नकली मूंगे पर यह रसायन डालने पर इस प्रकार का कोई झाग नहीं आता है. इस प्रकार यह प्रयोग असली मूंगे व नकली मूंगे में भेद करने में सहायक होता है.

  • रत्नों के बाजार में कुछ रत्नों का रंग, नकली होता है. इस प्रकार के रत्नों के लिये रंग पद्वति का प्रयोग किया जाता है. इस प्रकार के सभी रत्नों पर अल्कोहल या स्प्रिट डालकर इसका परिक्षण किया जा सकता है (analysis of gemstone by spirit and alcohol). इस परिक्षण में रत्न के नकली होने पर यह कैमिकल डालने पर रत्न का रंग उड जाता है. इस प्रकार असली व नकली में अन्तर स्पष्ट हो जाता है.

  • रत्नों के भीतरी हिस्सों को देखने के लिये बिजली के कृ्त्रिम रंगों का प्रयोग किया जाता है. जैसे अंबर रत्न पर किरण डालने पर वे पारदर्शक (transparency in gemstones) नजर आते है. इन बिजली के रंगों में जब असली माणिक्य को देखा जाता है. तो उसका रंग काला सा दिखाइ देता है. जबकि नकली माणिक्य इन रंगों में अंगारे जैसा प्रतीत होता है.

रत्नों की जांच के अन्य तरीके (Other ways to test Real Gemstones) 

  • 1. माणिक्य की जांच (Assessment of Real Ruby)

  • 1. असली माणिक्य को गाय के कच्चे दूध में रखने पर दूध गुलाबी रंग का दिखाई देता है. जबकि नकली माणिक्य इस रंग का नहीं दिखाई देगा.

  • 2. चांदी की थाली में असली माणिक्य को रखकर सूर्य की रोशनी में देखने पर इसमें से चांदी की थाली लाल रंग की दिखाय़ी देखी (place Ruby in the silver plate and keep it in the sun light).

  • 3. कांच के बरतन में माणिक्य रत्न रखने पर कांच का बर्तन भी लाल दिखाई देता है.

  • 4. असली माणिक्य को जब कमल की कली पर रखा जाता है. तो माणिक्य के प्रभाव से कली खीळ जाती है (real Ruby can blossom a lotus flower).

मोती की जांच (Inspection of Real and Fake Pearl) 

  • 1. कांच के गिलास में पानी डाल कर उसमें मोती रखा जाता है. अगर इस पानी से किरण निकल रही हों तो मोती को असली समझा जाता है.

  • 2. मिट्टी के बरतन में गौमूत्र डालकर उसमें मोती रखा जाता है. रातभर मोती को इसी बरतन में रखा जाता है. सुबह मोती को देखा जाता है. मोती पर इस उपाय का कोई प्रभाव नहीं पडा हों और मोती अंखड हों तो मोती को असली समझा जाता है.

  • 3. मोती को अनाज के भूसे से जोर से रगडा जाता है. मोती के नकली होने पर उसका चूरा हो जाता है. मोती पर कोई प्रभाव नहीं पड रहा हों तो यह मोती असली होता है (analysis of real Pearl through wheat fodder).

  • 4. इस उपाय के अन्तर्गत मोती को शुद्ध गाडे घी में कुछ देर के लिये रखा जाता है. अगर मोती असली होने पर घी के पिघलने की संभावनाएं बनती है (real pearl can melt the Ghee).

मूंगे की जांच (Assessment of Coral) 

  • 1. दूध में असली मूंगे को रखने पर लाल रंग का प्रकाश निकलता है.

  • 2. जब असली मूंगा धूप में कागज पर या कपास पर रखा जाता है. तो उसमें अग्नि उत्पन्न हो जाती है.

  • 3. असली मूंगे को जब खून में रखा जाता है. तो खूंन के जमने की संभावनाएं रहती है.

  • 4. पन्ना की जांच (Analysis of Emerald)

  • 1. पन्ने को जब पानी से भरे गिलास में रखने पर पन्ना के असली होने पर उससे हरे रंग की किरणें निकलती दिखाई देती है.

  • 2. जब पन्ने को साफ कपडे में बांध कर उंचाई पर लटकाकर रखा जाता है. तो कपडा हरा दिखाई देने पर पन्ना असली होता है (Emeral can change the white color cloth into green color).

  • 3. असली पन्ने हाथ में लेने पर हल्का महसूस होता है.

पुखराज (Yellow Sapphire) 

  • 1. सफेद कपडें पर पुखराज रख कर इसे धूप में रख्नने पर असली पुखराज होने पर वह पीला दिखाई देगा.

  • 2. पुखराज को दूध में 24 घंटे रखने पर भी पुखराज की चमक बनी रहे तो पुखराज को असली समझना चाहिए.

  • 3. सांप या जहरीले प्राणी के काटने पर काटे गये स्थान पर असली पुखराज लगाने पर जहर कम हो जाता है (rel Yellow Sapphire can reduce poison of the snake or any poisonous animal from body).

हीरे की जांच (Test of the real Diamond) 

  • 1. हीरे को जब गरम दूध में रखा जाता है. हीरे को रखने पर अगर दूध शीघ्र ठण्डा हो जाये तो हीरे को असली समझना चाहिए.

  • 2. असली हीरे को गरम पिघले हुए घी में रखने पर अगर कुछ देर में घी ठण्डा हो जाये तो व्यक्ति को इस हीरे को असली समझना चाहिए.

  • 3. हीरे को धूप में रखने पर हीरे से अगर इंद्रधनुष के रंग दिखाई दे तो हीरे को असली समझना चाहिए.

  • 4. हीरे को धारण करने के बाद विपरींत लिंग के शीघ्र आकृ्षित होंने कि संभावनाएं बनती है.

नीलम की जांच (Test of Real and Fake Blue Sapphire) 

  • 1. असली नीलम को जब धूप में रखा जाता है. उसमें से तेज किरणें निकलनी आरम्भ हो जाती है.

  • 2. नीलम को जब ग्लास में रखा जाता है. तो उससे नीली किरणें निकलती है.

  • 3. इसी प्रकार जब असली नीलम को दूध में रखा जाता है. तो दूध का रंग नीला दिखाई देता है.

गोमेद (Agate) 

  • 1. गोमेद को गोमूत्र में रखने पर गौमूत्र का रंग बदलने लगता है.

  • 2. लकडी के भूस्से में गोमेद को रगडने पर अगर गोमेद की चमक पर कोई प्रभाव न पडे तो गोमेद को असली समझना चाहिए.

लहसूनियां (Cat's Eye) 

  • 1. लहसुनियां को सफेद कपडे से रगडने पर लहसूनियां की चमक में वृ्द्धि होती है. तो इसे असली समझना चाहिए.

  • 2. अंधेरे स्थान पर जब लहसूनियां को रखा जाता है. तो उससे प्रकाश की किरण नजर आती है.

उपरोक्त प्रयोग केवल मान्यताओं पर आधारित है. इनके व्यवहारिक होने के विषय में संशय का भाव है.