चर्म रोग के ज्योतिषीय कारण
- शरीर की चमड़ी का कारक बुध होता है। कुंडली में बुध जितनी उत्तम अवस्था में होगा, जातक की चमड़ी उतनी ही चमकदार एवं स्वस्थ होगी। - कुंडली में बुध पाप ग्रह राहु, केतु या शनि से दृष्टि में या युति के साथ होगा तो चर्म रोग होने के पूरे आसार बनेंगे। - रोग की तीव्रता ग्रह की प्रबलता पर निर्भर करती है. एक ग्रह दूसरे ग्रह को कितनी डिग्री से पूर्ण दीप्तांशों में देखता है या नहीं। - रोग सामान्य भी हो सकता है और गंभीर भी। - ग्रह किस नक्षत्र में कितना प्रभावकारी है - यह भी रोग की भीषणता बताता है क्योंकि एक रोग सामान्य सा उभरकर आता है और ठीक हो जाता है। दूसरा रोग लंबा समय लेता है, साथ ही जातक के जीवन में चल रही महादशा पर भी निर्भर करता है। - मंगल रक्त का कारक है, यदि मंगल किसी भी तरह से पाप ग्रहों से ग्रस्त हो, शत्रु राशिस्थ हो, नीच हो, वक्री हो तो वह रक्त संबंधी रोग पैदा करेगा. मुख्य बात यह है कि यदि मंगल बुध का योग होगा तो किसी भी प्रकार की समस्या अवश्य खड़ी होगी। - इसी प्रकार मंगल शनि का योग खुजली पैदा करता है, खून खराब करता है। लग्नेश से किसी भी प्रकार का सम्बन्ध होने पर वह अवश्य ही चर्म-रोग का कारण बनता है। यदि यह योग कुंडली में हो किन्तु दशा अच्छी चल रही हो तो हो सकता है कि वह रोग ना हो जब तक उस ग्रह की दशा अन्तर्दशा पुनः ना आये। - यदि शनि पूर्ण बली हो और मंगल के साथ तृतीय स्थान पर हो तो जातक को खुजली का रोग होता है। - यदि मंगल और केतु छठे या बारहवें स्थान में हो तो चर्म रोग होता है। - यदि मंगल और शनि छठे या बारहवें भाव में हों तो व्रण (फोड़ा) होता है। - यदि मंगल षष्ठेश के साथ हो तो चर्म रोग होता है। - यदि बुध और राहु षष्ठेश और लग्नेश के साथ हो तो चर्म-रोग होता है (एक्जीमा जैसा)। - यदि षष्ठेश पाप ग्रह होकर लग्न, अष्टम या दशम स्थान में बैठा हो तो चर्म-रोग होता है। - यदि षष्ठेश शत्रुगृही, नीच, वक्री अथवा अस्त हो तो चर्म -रोग होता है। - षष्टम भाव में कोई भी ग्रह नीच, शत्रुक्षेत्री, वेक्री अथवा अस्त हो तो भी चर्म रोग होता है। - यदि षष्ठेश पाप ग्रह के साथ हो तथा उस पर लग्नस्थ, अष्टमस्थ दशमस्थ पाप ग्रह की दृष्टि हो तो चर्म रोग होता है। - यदि शनि अष्टमस्थ और मंगल सप्त्मस्थ हो तो जातक को पंद्रह से तीस वर्ष की आयु में चेहरे पर फुंसी होती है। - यदि लग्नेश मंगल के साथ लग्नगत हो तो पत्थर अथवा किसी शस्त्र से सिर में व्रण होते हैं। - यदि लग्नेश मंगल के साथ लग्नगत हो और उसके साथ पाप ग्रह हो अथवा पाप ग्रह की दृष्टि पड़ती हो तो पत्थर अथवा किसी शस्त्र के द्वारा सिर में व्रण होता है। - यदि लग्नेश शनि के साथ लग्न में बैठा हो और उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो अथवा लग्न में और कोई भी पाप ग्रह हो तो जातक के सिर में चोट से या अग्नि से व्रण होते हैं। - यदि षष्ठेश, राहु अथवा केतु के साथ लग्न में बैठा हो तो जातक के शरीर में व्रण होता है।Medical Astrology: Eye Diseases and Cure : मेडिकल ज्योतिष: नेत्र रोगऔर इलाज
Note-यह ब्लॉग मैंने अपनी रूची के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है वह मेरी अपनी नहीं है कहीं न कहीं से ली गई है। अगर किसी के कॉपी राइट का उल्लघन होता है तो मुझे क्षमा करें।मैं हर इंसान के लिए ज्योतिष के ज्ञान के प्रसार के बारे में सोच कर इस ग को बनाए रख रहा हूँ।
- शरीर की चमड़ी का कारक बुध होता है। कुंडली में बुध जितनी उत्तम अवस्था में होगा, जातक की चमड़ी उतनी ही चमकदार एवं स्वस्थ होगी। - कुंडली में बुध पाप ग्रह राहु, केतु या शनि से दृष्टि में या युति के साथ होगा तो चर्म रोग होने के पूरे आसार बनेंगे। - रोग की तीव्रता ग्रह की प्रबलता पर निर्भर करती है. एक ग्रह दूसरे ग्रह को कितनी डिग्री से पूर्ण दीप्तांशों में देखता है या नहीं। - रोग सामान्य भी हो सकता है और गंभीर भी। - ग्रह किस नक्षत्र में कितना प्रभावकारी है - यह भी रोग की भीषणता बताता है क्योंकि एक रोग सामान्य सा उभरकर आता है और ठीक हो जाता है। दूसरा रोग लंबा समय लेता है, साथ ही जातक के जीवन में चल रही महादशा पर भी निर्भर करता है। - मंगल रक्त का कारक है, यदि मंगल किसी भी तरह से पाप ग्रहों से ग्रस्त हो, शत्रु राशिस्थ हो, नीच हो, वक्री हो तो वह रक्त संबंधी रोग पैदा करेगा. मुख्य बात यह है कि यदि मंगल बुध का योग होगा तो किसी भी प्रकार की समस्या अवश्य खड़ी होगी। - इसी प्रकार मंगल शनि का योग खुजली पैदा करता है, खून खराब करता है। लग्नेश से किसी भी प्रकार का सम्बन्ध होने पर वह अवश्य ही चर्म-रोग का कारण बनता है। यदि यह योग कुंडली में हो किन्तु दशा अच्छी चल रही हो तो हो सकता है कि वह रोग ना हो जब तक उस ग्रह की दशा अन्तर्दशा पुनः ना आये। - यदि शनि पूर्ण बली हो और मंगल के साथ तृतीय स्थान पर हो तो जातक को खुजली का रोग होता है। - यदि मंगल और केतु छठे या बारहवें स्थान में हो तो चर्म रोग होता है। - यदि मंगल और शनि छठे या बारहवें भाव में हों तो व्रण (फोड़ा) होता है। - यदि मंगल षष्ठेश के साथ हो तो चर्म रोग होता है। - यदि बुध और राहु षष्ठेश और लग्नेश के साथ हो तो चर्म-रोग होता है (एक्जीमा जैसा)। - यदि षष्ठेश पाप ग्रह होकर लग्न, अष्टम या दशम स्थान में बैठा हो तो चर्म-रोग होता है। - यदि षष्ठेश शत्रुगृही, नीच, वक्री अथवा अस्त हो तो चर्म -रोग होता है। - षष्टम भाव में कोई भी ग्रह नीच, शत्रुक्षेत्री, वेक्री अथवा अस्त हो तो भी चर्म रोग होता है। - यदि षष्ठेश पाप ग्रह के साथ हो तथा उस पर लग्नस्थ, अष्टमस्थ दशमस्थ पाप ग्रह की दृष्टि हो तो चर्म रोग होता है। - यदि शनि अष्टमस्थ और मंगल सप्त्मस्थ हो तो जातक को पंद्रह से तीस वर्ष की आयु में चेहरे पर फुंसी होती है। - यदि लग्नेश मंगल के साथ लग्नगत हो तो पत्थर अथवा किसी शस्त्र से सिर में व्रण होते हैं। - यदि लग्नेश मंगल के साथ लग्नगत हो और उसके साथ पाप ग्रह हो अथवा पाप ग्रह की दृष्टि पड़ती हो तो पत्थर अथवा किसी शस्त्र के द्वारा सिर में व्रण होता है। - यदि लग्नेश शनि के साथ लग्न में बैठा हो और उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो अथवा लग्न में और कोई भी पाप ग्रह हो तो जातक के सिर में चोट से या अग्नि से व्रण होते हैं। - यदि षष्ठेश, राहु अथवा केतु के साथ लग्न में बैठा हो तो जातक के शरीर में व्रण होता है।Medical Astrology: Eye Diseases and Cure : मेडिकल ज्योतिष: नेत्र रोगऔर इलाज
Eye Diseases and their Vedic Cure
Cause: 1. If the 2nd and 12th house of your natal chart are aspected by the sun or moon or they are placed in these two house, it may cause weakening of eyes or myopia. This holds true for the D9 or Navmansha chart as well.
2. If Venus or Saturn are in the 2nd house and the Lord of the Lagna (ascendant) and the 2nd house are aspected by or combined with the lord of the 8th house then it may lead to serious incurable eye diseases.
3. If the 2nd or 12th house are aspected by Saturn or Rahu, it may also cause Myopia or in worse cases and some specific conditions cancer.
3. If the 2nd or 12th house are aspected by Saturn or Rahu, it may also cause Myopia or in worse cases and some specific conditions cancer.
Remedy: 1. Read Chakshushi Strot (चाक्षुषी स्त्रोत ) regularly starting from Sunday at sunrise for cure and prevention from all kinds of eye diseases.
2. 1cup spinach juice + 1tbsp honey regulary is a great cure for eye weakness.
Medical Astrology: Planets and Corresponding Body Systems
Planets and Corresponding Body Systems
Sun: Heart, Blood Circulation, Eyes, Backbone, Oxygen, Cholesterol.
Moon: Eyes, Respiratory System (Cold, cough, tonsils), Reproductive System(female), Glucose.
Mercury: Nose, Mouth, Lungs, Veins, Tongue, Hands, Skin, Small Intestine, Throat, Sodium, Potassium.
Venus: Cheeks, Lips, Reproductive Organs, Insulin, White Blood Cells, Chromosomes/Sperms.
Mars: Muscular System, Pancreas, Intestines, Red Blood Cells.
Jupiter: Digestive System, Liver, Ears, Gall Bladder, Kidney, Haemoglobin, Enzymes, Pepsin, All digestive juices, Pitta.
Saturn: Teeth, Bones, Eyes, Excretory System, Knees, Joints, Lungs & Skin diseases, Calcium, Iron.
Rahu: Similar to Saturn, Large Intestine, Poisoning, Hairs, Zinc.
Ketu: Similar to Mars, B.P., Hidden diseases, Nails, Pancreas, Acids
Medical Astrolgy's Perspective about the 12 House of the Zodiac and the governing Signs:
First house or Aries: Body in general, Head, Face, Facial bones, Brain and Blood Vessels of the brain, complexion.
Second house or Taurus: Teeth, speech, right eye, Throat, Larynx, Cerebellum, Neck and Bones, Blood vessels and nerves connecting throat and neck.
Third house or Gemini: Right ear, Shoulders, Collar, Hands and the related bones, Lungs, breath, blood.
Fourth house or Cancer: Last phase of life, Chest, Breast, Ribs, Food poisoning, Stomach, Gastric and digestive system.
Fifth house or Leo: Heart, mind, and Spinal chord.
Sixth house or Virgo: Disease in general, Kidneys, Stomach, Bowels, Intestines and Abdomen.
Seventh house or Libra: Waist, Navel cavity, Lumbar region and skin.
Eighth house or Scorpio: Incurable diseases, Urinary and sexual organs, Pelvic bones, Bladder, and anus.
Ninth house or Sagittarius: Hips, Arterial system, Nerves and Thighs.
Tenth house or Capricorn: Knees, Hams, Joints, and bones.
Eleventh house or Aquarius: Legs, Blood circulation and ankles, Left ear.
Twelfth house or Pisces: Lymphatic system, Feet and Toes, left eye, hospitalization, death.
मेडिकल ज्योतिष: नेत्र रोग और चिकित्सा: मेडिकल ज्योतिष : नेत्र रोग और इलाजनेत्र रोगों और उनके वैदिक इलाजकारण: 1 . अपने प्रसव चार्ट के 2 और 12 वें घर सूरज या चाँद द्वारा aspected कर रहे हैं या वे इन दोनों घर में रखा जाता है, यह आंखों या निकट दृष्टि से कमजोर हो सकती है. इस D9 या Navmansha चार्ट के लिए सच है के रूप में अच्छी तरह से .2 . शुक्र या शनि ग्रह 2 घर में हैं और लग्न से प्रभु ( लग्न ) और 2 हाउस द्वारा aspected या 8 वीं घर के स्वामी के साथ संयुक्त कर रहे हैं तो यह गंभीर लाइलाज नेत्र रोगों को जन्म दे सकती है .3 . 2 या 12 वें घर शनि या राहु द्वारा aspected रहे हैं, यह भी निकट दृष्टि या बदतर मामलों में और कुछ विशेष परिस्थितियों के कैंसर का कारण बन सकता है .उपाय: 1 . नियमित रूप से नेत्र रोगों के सभी प्रकार से इलाज और रोकथाम के लिए सूर्योदय के समय रविवार से शुरू होने वाले Chakshushi Strot ( चाक्षुषी स्त्रोत ) पढ़ें .2 . 1cup पालक का रस + 1tbsp शहद नियमित रूप से आंख कमजोरी के लिए एक महान इलाज है .मेडिकल ज्योतिष: ग्रहों और इसी शरीर प्रणालीग्रह और इसी शरीर प्रणालीसूर्य : हृदय, रक्त परिसंचरण, आंखें , रीढ़ की हड्डी , ऑक्सीजन , कोलेस्ट्रॉल .चंद्रमा : आंखें , श्वसन प्रणाली ( सर्दी, खाँसी , टॉन्सिल ) , प्रजनन प्रणाली ( महिला ) , ग्लूकोज .बुध: नाक, मुंह , फेफड़े, नसों , जीभ, हाथ , त्वचा , छोटी आंत , गले, सोडियम , पोटेशियम .वीनस : गाल, होंठ , प्रजनन अंगों , इंसुलिन , सफेद रक्त कोशिकाओं , गुणसूत्रों / Sperms .मंगल ग्रह : मांसपेशियों प्रणाली , अग्न्याशय , आंतों, लाल रक्त कोशिकाओं.बृहस्पति : पाचन तंत्र, जिगर , कान, पित्ताशय , किडनी , हीमोग्लोबिन , एंजाइमों , पेप्सिन , सभी पाचक रस , पित्त .शनि ग्रह : दांत , हड्डी , आंख, उत्सर्जन तंत्र , घुटनों, जोड़ों, फेफड़ों और त्वचा रोग, कैल्शियम , आयरन .राहु : शनि ग्रह के समान ही, बड़ी आंत , विषाक्तता, बाल, जिंक .केतु : मंगल ग्रह , बीपी , हिडन रोगों , नाखून , अग्न्याशय , एसिड के लिए इसी प्रकार कीराशि चक्र और गवर्निंग लक्षण के 12 घर के बारे में मेडिकल Astrolgy के परिप्रेक्ष्य :पहला घर या मेष: सामान्य रूप से शरीर , सिर, चेहरे , चेहरे की हड्डियों , मस्तिष्क और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं, रंगरूप .दूसरे घर या वृषभ : दांत , भाषण , दाहिनी आंख , गला , गला , सेरिबैलम, गर्दन और हड्डियों, रक्त वाहिकाओं और गले और गर्दन को जोड़ने नसों .तीसरे घर या मिथुन: सही कान , कंधे , कॉलर , हाथ और संबंधित हड्डियां , फेफड़े, सांस , खून .चौथे घर या कैंसर: जीवन , छाती, स्तन , पसलियों , विषाक्त भोजन , पेट , गैस्ट्रिक और पाचन तंत्र के अंतिम चरण .पांचवें घर या लियो : दिल, दिमाग , और मेरूदंड ., गुर्दे, पेट , आंत, आंतों और पेट सामान्य में रोग: छठे घर या कन्या .सातवें घर या तुला : कमर , नाभि गुहा , काठ का क्षेत्र और त्वचा .आठवें घर या वृश्चिक : असाध्य रोगों , मूत्र और यौन अंगों , श्रोणि हड्डियों , मूत्राशय , और गुदा .नौवें घर या धनु: कूल्हों , धमनी प्रणाली , नसों और जांघों.दशम भाव या मकर : घुटनों , hams , जोड़ों और हड्डियों .ग्यारहवें घर या कुंभ राशि : पैर , रक्त परिसंचरण और एड़ियों , बाएं कान .बारहवें घर या मीन : लिम्फेटिक सिस्टम , पैरों और पंजों , बाईं आंख , अस्पताल में भर्ती , मौत .
Second house or Taurus: Teeth, speech, right eye, Throat, Larynx, Cerebellum, Neck and Bones, Blood vessels and nerves connecting throat and neck.
Third house or Gemini: Right ear, Shoulders, Collar, Hands and the related bones, Lungs, breath, blood.
Fourth house or Cancer: Last phase of life, Chest, Breast, Ribs, Food poisoning, Stomach, Gastric and digestive system.
Fifth house or Leo: Heart, mind, and Spinal chord.
Sixth house or Virgo: Disease in general, Kidneys, Stomach, Bowels, Intestines and Abdomen.
Seventh house or Libra: Waist, Navel cavity, Lumbar region and skin.
Eighth house or Scorpio: Incurable diseases, Urinary and sexual organs, Pelvic bones, Bladder, and anus.
Ninth house or Sagittarius: Hips, Arterial system, Nerves and Thighs.
Tenth house or Capricorn: Knees, Hams, Joints, and bones.
Eleventh house or Aquarius: Legs, Blood circulation and ankles, Left ear.
Twelfth house or Pisces: Lymphatic system, Feet and Toes, left eye, hospitalization, death.
मेडिकल ज्योतिष: नेत्र रोग और चिकित्सा: मेडिकल ज्योतिष : नेत्र रोग और इलाजनेत्र रोगों और उनके वैदिक इलाजकारण: 1 . अपने प्रसव चार्ट के 2 और 12 वें घर सूरज या चाँद द्वारा aspected कर रहे हैं या वे इन दोनों घर में रखा जाता है, यह आंखों या निकट दृष्टि से कमजोर हो सकती है. इस D9 या Navmansha चार्ट के लिए सच है के रूप में अच्छी तरह से .2 . शुक्र या शनि ग्रह 2 घर में हैं और लग्न से प्रभु ( लग्न ) और 2 हाउस द्वारा aspected या 8 वीं घर के स्वामी के साथ संयुक्त कर रहे हैं तो यह गंभीर लाइलाज नेत्र रोगों को जन्म दे सकती है .3 . 2 या 12 वें घर शनि या राहु द्वारा aspected रहे हैं, यह भी निकट दृष्टि या बदतर मामलों में और कुछ विशेष परिस्थितियों के कैंसर का कारण बन सकता है .उपाय: 1 . नियमित रूप से नेत्र रोगों के सभी प्रकार से इलाज और रोकथाम के लिए सूर्योदय के समय रविवार से शुरू होने वाले Chakshushi Strot ( चाक्षुषी स्त्रोत ) पढ़ें .2 . 1cup पालक का रस + 1tbsp शहद नियमित रूप से आंख कमजोरी के लिए एक महान इलाज है .मेडिकल ज्योतिष: ग्रहों और इसी शरीर प्रणालीग्रह और इसी शरीर प्रणालीसूर्य : हृदय, रक्त परिसंचरण, आंखें , रीढ़ की हड्डी , ऑक्सीजन , कोलेस्ट्रॉल .चंद्रमा : आंखें , श्वसन प्रणाली ( सर्दी, खाँसी , टॉन्सिल ) , प्रजनन प्रणाली ( महिला ) , ग्लूकोज .बुध: नाक, मुंह , फेफड़े, नसों , जीभ, हाथ , त्वचा , छोटी आंत , गले, सोडियम , पोटेशियम .वीनस : गाल, होंठ , प्रजनन अंगों , इंसुलिन , सफेद रक्त कोशिकाओं , गुणसूत्रों / Sperms .मंगल ग्रह : मांसपेशियों प्रणाली , अग्न्याशय , आंतों, लाल रक्त कोशिकाओं.बृहस्पति : पाचन तंत्र, जिगर , कान, पित्ताशय , किडनी , हीमोग्लोबिन , एंजाइमों , पेप्सिन , सभी पाचक रस , पित्त .शनि ग्रह : दांत , हड्डी , आंख, उत्सर्जन तंत्र , घुटनों, जोड़ों, फेफड़ों और त्वचा रोग, कैल्शियम , आयरन .राहु : शनि ग्रह के समान ही, बड़ी आंत , विषाक्तता, बाल, जिंक .केतु : मंगल ग्रह , बीपी , हिडन रोगों , नाखून , अग्न्याशय , एसिड के लिए इसी प्रकार कीराशि चक्र और गवर्निंग लक्षण के 12 घर के बारे में मेडिकल Astrolgy के परिप्रेक्ष्य :पहला घर या मेष: सामान्य रूप से शरीर , सिर, चेहरे , चेहरे की हड्डियों , मस्तिष्क और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं, रंगरूप .दूसरे घर या वृषभ : दांत , भाषण , दाहिनी आंख , गला , गला , सेरिबैलम, गर्दन और हड्डियों, रक्त वाहिकाओं और गले और गर्दन को जोड़ने नसों .तीसरे घर या मिथुन: सही कान , कंधे , कॉलर , हाथ और संबंधित हड्डियां , फेफड़े, सांस , खून .चौथे घर या कैंसर: जीवन , छाती, स्तन , पसलियों , विषाक्त भोजन , पेट , गैस्ट्रिक और पाचन तंत्र के अंतिम चरण .पांचवें घर या लियो : दिल, दिमाग , और मेरूदंड ., गुर्दे, पेट , आंत, आंतों और पेट सामान्य में रोग: छठे घर या कन्या .सातवें घर या तुला : कमर , नाभि गुहा , काठ का क्षेत्र और त्वचा .आठवें घर या वृश्चिक : असाध्य रोगों , मूत्र और यौन अंगों , श्रोणि हड्डियों , मूत्राशय , और गुदा .नौवें घर या धनु: कूल्हों , धमनी प्रणाली , नसों और जांघों.दशम भाव या मकर : घुटनों , hams , जोड़ों और हड्डियों .ग्यारहवें घर या कुंभ राशि : पैर , रक्त परिसंचरण और एड़ियों , बाएं कान .बारहवें घर या मीन : लिम्फेटिक सिस्टम , पैरों और पंजों , बाईं आंख , अस्पताल में भर्ती , मौत .
Note-यह ब्लॉग मैंने अपनी रूची के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है वह मेरी अपनी नहीं है कहीं न कहीं से ली गई है। अगर किसी के कॉपी राइट का उल्लघन होता है तो मुझे क्षमा करें।मैं हर इंसान के लिए ज्योतिष के ज्ञान के प्रसार के बारे में सोच कर इस ग को बनाए रख रहा हूँ।
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